भोपाल। मध्यप्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए उसे विकास से जोड़ने की दिशा में बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र को आधार बनाकर प्रदेश को पर्यटन और रोज़गार का नया ग्रोथ इंजन बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेशभर में लगभग 900 करोड़ रुपये की लागत से 20 धार्मिक एवं सांस्कृतिक ‘लोक’ विकसित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में 580 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 17 प्रमुख लोकों पर तेजी से काम चल रहा है। सागर में 101 करोड़ रुपये से ‘संत रविदास लोक’ निर्माणाधीन है। सलकनपुर का ‘देवी लोक’ और ओरछा का ‘श्रीरामराजा लोक’ अंतिम चरण में हैं, जबकि मंदसौर स्थित ‘भगवान पशुपतिनाथ लोक परिसर’ पूर्ण होकर जनता को समर्पित किया जा चुका है। भोपाल में ‘वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक’, जानापाव में ‘भगवान परशुराम लोक’ तथा महेश्वर में ‘देवी अहिल्या संग्रहालय’ भी आकार ले चुके हैं।
आगामी चरण में ओंकारेश्वर का ‘ममलेश्वर लोक’, बैतूल का ‘ताप्ती लोक’ और मैहर का ‘माँ शारदा लोक’ प्रस्तावित हैं। महेश्वर में ‘देवी अहिल्या लोक’ तथा अमरकंटक में ‘माँ नर्मदा लोक’ के द्वितीय चरण का निर्माण भी किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि ये लोक आस्था के केंद्र होने के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगे, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।








