विदिशा। पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देश पर गठित पुलिस पंचायत अब जिले में सीनियर सिटीजन के अधिकार और सम्मान की मजबूत आवाज बनकर उभर रही है। इसी क्रम में 4 फरवरी 2026 को पुलिस पंचायत की साप्ताहिक बैठक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे की उपस्थिति में आयोजित की गई। बैठक में पंचायत कोर कमेटी के सदस्य श्री आर. कुलश्रेष्ठ, श्री प्रमोद व्यास, श्री विनोद शाह, श्री डी.के. वाजपेयी, श्री अजय टंडन, श्री अतुल शाह एवं डॉ. सचिन गर्ग मौजूद रहे। बैठक में बुजुर्गों से जुड़े कई संवेदनशील मामलों की सुनवाई कर मानवीय आधार पर समाधान कराया गया।

85 वर्षीय महिला को मिला मकान का अधिकार
बैठक का सबसे प्रमुख प्रकरण 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला से जुड़ा रहा। महिला ने शिकायत में बताया कि उनके पति, जो शासकीय सेवक थे, के निधन के बाद उन्हें फैमिली पेंशन प्राप्त नहीं हो रही है तथा पति की संपत्ति पर दूसरी महिला का अधिकार दर्ज है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि मृतक ने दूसरी महिला से विधिवत विवाह किया था और वह नॉमिनी के रूप में दर्ज थी। अधिक उम्र और जानकारी के अभाव में बुजुर्ग महिला अपने अधिकारों का दावा नहीं कर सकी थीं।
पुलिस पंचायत ने संवेदनशीलता दिखाते हुए दोनों पक्षों के बीच विस्तृत चर्चा कर सहमति बनाई कि भोपाल और सिरोंज स्थित दो मकानों में से एक मकान पूर्ण रूप से बुजुर्ग आवेदिका को तथा दूसरा दूसरी महिला को दिया जाएगा। समाधान पर बुजुर्ग महिला एवं उनके परिजनों ने संतोष जताते हुए पुलिस पंचायत की सराहना की।
पारिवारिक कलह का भावुक समझौता
दूसरा मामला मिठास क्षेत्र के एक बुजुर्ग दंपत्ति से जुड़ा था। उन्होंने पुत्र और बहू पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर विस्तार से चर्चा की गई। पंचायत सदस्यों ने पारिवारिक सौहार्द बनाए रखने, संयमित भाषा के उपयोग तथा आपसी संवाद बढ़ाने की सलाह दी।
सहमति बनी कि भविष्य में कोई भी पक्ष एक-दूसरे को अपशब्द नहीं कहेगा और विवाद की स्थिति में घटनाक्रम लिखित रूप में दर्ज करेगा। समझौते के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के चरण स्पर्श किए और मिठाई खिलाकर मनमुटाव समाप्त किया, जिससे बैठक का वातावरण भावुक हो उठा।
विज्ञापन के लिए संपर्क करे
Call / WhatsApp - 9826291862
उधारी विवाद में किस्तों से भुगतान पर सहमति
तीसरे प्रकरण में सिरोंज निवासी एक सीनियर सिटीजन ने शिकायत की कि उन्होंने ₹50,000 उधार दिए थे, जिनकी वापसी कोर्ट में राजीनामा होने के बावजूद नहीं हुई। पंचायत ने स्पष्ट किया कि न्यायालयीन आदेश का पालन अनिवार्य है। मानवीय आधार पर आवेदक ने ₹3,000 प्रतिमाह किस्त स्वीकार की। अनावेदक ने सुरक्षा के तौर पर पूरी राशि के बराबर का चेक देने और नियमित भुगतान करने की सहमति दी।
बैठक में अन्य प्रकरणों की भी सुनवाई की गई। कुछ मामलों में पक्षकारों की अनुपस्थिति के कारण अगली तिथि निर्धारित की गई। पुलिस पंचायत ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि बुजुर्गों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा पारिवारिक एवं सामाजिक विवादों का समाधान मानवीय दृष्टिकोण से किया जाएगा।








