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पैक्ड फूड पर अब सामने दिखेगी ‘हेल्थ वार्निंग’! ज्यादा शुगर-नमक-फैट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त !

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नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ रहे मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग के मामलों के बीच पैकेटबंद खाद्य पदार्थों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। 10 फरवरी को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने संकेत दिया कि जल्द ही उपभोक्ताओं को पैक्ड फूड खरीदते समय पैकेट के सामने ही शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट की स्पष्ट जानकारी देखने को मिल सकती है।

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यह सुनवाई जस्टिस JB Pardiwala और जस्टिस KV Viswanathan की खंडपीठ ने की। याचिका में मांग की गई थी कि जिन पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट अधिक मात्रा में हो, उन पर फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग लेबल लगाना अनिवार्य किया जाए।

FSSAI को कोर्ट के निर्देश

अदालत ने देश की खाद्य नियामक संस्था Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) को निर्देश देते हुए कहा—

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  • हाई शुगर, हाई सॉल्ट, हाई फैट उत्पादों पर
    सामने चेतावनी लेबल लगाने पर गंभीरता से विचार किया जाए।

  • इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी
    चार सप्ताह के भीतर कोर्ट को दी जाए।

  • कंपनियों के व्यावसायिक हित से अधिक
    जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए।

कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी भी दी कि यदि नियामक संस्था ठोस कदम नहीं उठाती है तो न्यायालय स्वयं हस्तक्षेप कर सकता है।

क्यों जरूरी हैं वार्निंग लेबल?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन तेजी से बढ़ा है। इस पर टिप्पणी करते हुए पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ डॉ. Arun Gupta ने कहा कि अधिकांश पैकेज्ड फूड में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स कम होते हैं, जबकि शुगर और फैट अत्यधिक मात्रा में डाले जाते हैं।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित शोध श्रृंखला का हवाला देते हुए बताया—

  • ज्यादा शुगर → मोटापा → डायबिटीज जोखिम

  • ज्यादा नमक → हाई ब्लड प्रेशर

  • हाई बीपी → दिल की बीमारी खतरा

  • अधिक सोडियम → किडनी पर असर

सिर्फ लेबल काफी नहीं: विशेषज्ञ

डॉ. गुप्ता और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि वार्निंग लेबल के साथ-साथ सरकार को अतिरिक्त कदम भी उठाने चाहिए—

  • हाई शुगर/फैट उत्पादों के विज्ञापन सीमित हों

  • बच्चों के टीवी स्लॉट में जंक फूड ऐड बंद हों

  • ऐसे उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाए

  • स्कूल कैंटीन में जंक फूड बिक्री रोकी जाए

  • हेल्दी फूड को सस्ता किया जाए

  • बड़े स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलें

बढ़ती बीमारियों ने बढ़ाई चिंता

भारत में—

  • मोटापा

  • टाइप-2 डायबिटीज

  • हृदय रोग

  • हाई ब्लड प्रेशर

के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड खपत से जोड़ रहे हैं।

क्या बदल सकता है आगे?

यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो—

  • चिप्स, नमकीन, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, इंस्टेंट फूड
    जैसे उत्पादों पर सामने चेतावनी लिखी होगी

  • उपभोक्ता खरीदने से पहले जोखिम समझ सकेंगे

  • कंपनियों पर फॉर्मूला सुधारने का दबाव बढ़ेगा


सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भारत में पैकेज्ड फूड लेबलिंग नियमों में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है। यदि फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग अनिवार्य होती है, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।

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