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विधानसभा में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर कांग्रेस-बीजेपी में तीखी नोंकझोंक, ‘सारे कुत्तों से मुझे ही निपटना पड़ता है’ – कैलाश विजयवर्गीय !

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आवारा कुत्तों से बढ़ते खतरे का मुद्दा विधानसभा में जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम नहीं हो रही है। उन्होंने इस पूरे अभियान में अनियमितताओं और गड़बड़ी की आशंका भी जताई। इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस और बीजेपी विधायकों के बीच तीखी नोंकझोंक भी देखने को मिली।

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मामले पर जवाब देते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बीते एक वर्ष में कुत्तों के काटने से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि आवारा श्वान सदियों से मानव बस्तियों के बीच सामुदायिक प्राणी के रूप में रह रहे हैं, लेकिन मौसम में बदलाव, कुपोषण और बीमारियों के कारण उनका व्यवहार आक्रामक हो जाता है।

मंत्री विजयवर्गीय ने आगे बताया कि कुत्तों की संख्या नियंत्रण के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल लागू किया गया है। नसबंदी केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है तथा एंटी-रेबीज टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है। इस कार्य में नगरीय प्रशासन, पशुपालन, पंचायत एवं स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभाग के अपर मुख्य सचिव स्तर पर भी इस विषय की समीक्षा की जा चुकी है।

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इधर कांग्रेस ने चर्चा को व्यापक बनाते हुए इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा भी सदन में उठाया। विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायकों ने प्रदर्शन किया और बोतलों में गंदा पानी भरकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भागीरथपुरा में 35 लोगों की मौत के बावजूद अब तक किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ, जबकि सरकार सदन में आवारा कुत्तों के मुद्दे को प्राथमिकता दे रही है।

उज्जैन जिले की तराना सीट से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इंदौर की घटना ने प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की छवि को भी प्रभावित किया है। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

कुल मिलाकर, आवारा कुत्तों का मुद्दा केवल शहरी सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सदन में जनस्वास्थ्य, नगरीय प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे बड़े सवालों को भी केंद्र में ले आया। अब देखना होगा कि सरकार नियंत्रण उपायों को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाती है।

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