विदिशा। जिले में संचालित बाल भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान के अंतर्गत प्रशासन द्वारा सतत कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के निर्देशन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती विनीता लोढ़ा के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने भिक्षावृत्ति में लिप्त तीन बच्चों को रेस्क्यू किया।
कार्रवाई के दौरान दुर्गा नगर चौराहा से एक बच्चे तथा बस स्टैंड विदिशा क्षेत्र से दो बच्चों को भिक्षावृत्ति करते हुए पाया गया। टीम द्वारा बच्चों से पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने बताया कि वे सभी सलामतपुर के निवासी हैं और भिक्षावृत्ति करने के उद्देश्य से विदिशा शहर आए थे।
रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को नियमानुसार बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) विदिशा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति अध्यक्ष श्री रामबाबू प्रजापति, सदस्य श्री चंद्रभान सिंह बघेल, श्री दीवान सिंह एवं श्रीमती सुनीता दांगी द्वारा बच्चों के परिजनों से संपर्क कर उन्हें समिति के समक्ष बुलाया गया।
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समिति द्वारा परिजनों को समझाइश दी गई कि भिक्षावृत्ति करना एवं बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम की धारा 76 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। उन्हें निर्देशित किया गया कि बच्चों को भिक्षावृत्ति में न लगाएं तथा नियमित रूप से विद्यालय भेजना सुनिश्चित करें। आवश्यक परामर्श एवं चेतावनी देने के पश्चात बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
इस पूरी कार्रवाई में महिला एवं बाल विकास विभाग से श्री अनुज कुमार जैन, श्री संतोष रघुवंशी, श्री राजीव कौल तथा विशेष किशोर पुलिस इकाई से आरक्षक ममता चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती विनीता लोढ़ा ने बताया कि जिले में बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम हेतु विभाग द्वारा समय-समय पर विशेष अभियान चलाए जाते हैं। इन अभियानों का उद्देश्य बच्चों का संरक्षण सुनिश्चित करना तथा उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक बचपन उपलब्ध कराना है।








